Bhopal News: थाना पुलिस को नहीं लगी भनक, क्राइम ब्रांच ने दबिश देकर दो व्यक्तियों को दबोचा, दो शराब ठेकेदारों की संदिग्ध भूमिका सामने आई, तीन अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी

भोपाल। क्राइम ब्रांच ने बंद शौचालय की आड़ में चल रहे अवैध शराब दुकान में दबिश दी है। इस मामले की भनक स्थानीय कटारा हिल्स थाना पुलिस को भी नहीं लग सकी। पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा है। जबकि प्राथमिक पूछताछ में दो लायसेंसी शराब ठेकेदारों (Bhopal News) की भूमिका इस अवैध गिरोह से होने की बात सामने आई है। जांच के बाद एफआईआर में पहली बाहर बड़े मगरमच्छों के खिलाफ भोपाल पुलिस की तरफ से सीधी कार्रवाई होगी।
शौचालय के भीतर मिली 46 पेटियां
जानकारी के अनुसार यह ठिकाना कटारा हिल्स (Katara Hills) स्थित ग्राम बर्रई में चल रहा था। जिसकी भनक क्राइम ब्रांच (Bhopal Crime Branch) को लगी तो एक स्पेशल टीम दबिश देने के लिए बनाई गई थी। क्राइम ब्रांच ने धर्मेन्द्र उर्फ गोलू (Dharmendra Vishwakarma@Golu) के घर दबिश दी। वहां कमरे में पुलिस को प्रिंस नामदेव (Prince Namdev) भी मिला। कमरे में कुछ नहीं मिला लेकिन उसके बंद शौचालय के भीतर से अवैध शराब (Illegal Liquor) की 46 पेटियां मिली। जिसकी कीमत पुलिस ने 22 लाख रुपए बताई है। यह पेटियां राजधानी के अवधपुरी, बागसेवनिया, गोविंदपुरा और कटारा हिल्स में बांटी जाती थी। पुलिस ने घर के पास इन शराब पेटियों की तस्करी के लिए रखी स्कॉर्पियों (Scorpios) एमपी-04-2140 को भी जब्त किया है। बरामद माल व्हाट्स एप के जरिए होता था। इसके अलावा डिलीवरी देने के बाद पैसा यूपीआई के जरिए खातों में आता था। पुलिस इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सभी लेन-देन की जांच कर रही है। पुलिस को कार्टन के भीतर से 2250 क्वार्टर शराब मिली है। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल (Mobile) भी जब्त किए गए हैं। क्राइम ब्रांच ने
पिता गोविन्द विश्वकर्मा उम्र 35 साल और प्रिंस नामदेव पिता राजेश नामदेव उम्र 21 साल को गिरफ्तार कर लिया गया है। जिन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है। धर्मेंद्र विश्वकर्मा के खिलाफ मारपीट और एनडीपीएस का प्रकरण पहले दर्ज हो चुका है।
पुलिस के कई अधिकारी फंसेंगे

आरोपियों ने पूछताछ में बताया है कि बरामद माल उन्होंने बागमुगालिया (Bagmugalia) और राजगढ़ (Rajgarh) जिले के लायसेंसी शराब ठेकेदारों से लिया है। इसे वह कम कीमत में लेकर उसे अवैध तरीके से बेचने का काम कर रहे थे। इन बातों की पुष्टि के लिए क्राइम ब्रांच पड़ताल कर रही है। इधर, पुलिस को पता चला है कि स्थानीय स्तर पर भी पुलिस का सहयोग गिरोह को मिल रहा था। इसलिए कई बार छापे और दबिश की भनक अफसरों को लग जा रही थी। गिरोह को लेकर एक स्टिंग ऑपरेशन भी किया गया था। जिसमें कुछ रिकॉर्डिंग सामने आई तो उसमें कुछ पुलिस कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध होकर विवादों में आ सकती है। इसलिए बहुत गोपनीयता के साथ इस पूरे मामले में क्राइम ब्रांच को खुलासा करने का काम आला अधिकारियों की तरफ से दिया गया है।
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