Bhopal Digital Arrest: टेरर फंडिंग में फंसने से बचने का झांसा देकर 35 लाख रुपए ऐंठे, रिश्तेदारों और कर्ज लेकर भी महिला ने आरोपियों के खातों में जमा की थी रकम

भोपाल। प्रदेश में सायबर फ्रॉड के मामले बेतहाशा बढ़ गए हैं। जिनमें नकेल लगाने तमाम प्रयास सरकार की तरफ से किए जा चुके हैं। इसके बावजूद अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां फैली होने के कारण वास्तविक पीड़ितों को मदद मिलने से लेकर मामले में तत्काल समाधान भी नहीं हो पा रहा है। ताजा मामला भेापाल (Bhopal Digital Arrest) शहर के गोविंदपुरा थाने में दर्ज प्रकरण से सामने आया है। यहां एक डिजीटल अरेस्ट की घटना दस महीने पहले हुई थी। पहले सायबर क्राइम को यकीन था कि वह मामले को एक महीने के भीतर सुलझा लेगी। उसने मनी ट्रेल का पता लगाने का प्रयास किया। इस कवायद में वह प्रकरण दर्ज कराना ही भूल गई। अब रकम वापसी के लिए पीड़ित ने दरवाजा खटखटाया तो पुलिस को अपनी कमजोरी का अहसास हुआ।
जालसाजों ने एलआईसी की एक एफडी भी तुड़वाई
जानकारी के अनुसार पीड़ित उमा समद्दार (Uma Samaddar) पत्नी स्वर्गीय एस समद्दार हैं। वे गोविंदपुरा (Govindpura) स्थित साकेत नगर (Saket Nagar) में रहती हैं। उनके साथ सायबर फ्रॉड (Cyber Fraud) की घटना 23 सितंबर, 2025 को हुई थी। उमा समद्दार भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और डाक घर के लिए एजेंट का काम करती है। उनके यूको बैंक (UCO Bank) खाते से पांच किस्त में 35 लाख रुपए जमा कराए गए। जालसाजों ने एलआईसी की एक एफडी भी तुड़वाई। पीड़ित परिवार को आरोपियों ने पुलिस विभाग (Police Department) का अफसर बनकर फोन लगाया था। आरोपियों ने पुलिस मुख्यालय के सामने खड़े होकर वीडियो कॉल (Video Call) किया था। जालसाजों ने बताया कि उनके खाते में सात करोड़ रुपए आए है जो टेरर फंडिंग (Terror Funding) के हैं। गिरफ्तारी से बचने और जांच में सहयोग का झांसा देकर डेढ़ महीने के भीतर में सरकारी बैंक के खाते में जमा होने वाली रकम वापस लौटाने का बोला गया था। आरोपियों ने महिला के अलावा उनके बच्चों को गिरफ्तार करने की धमकी दी थी। भय में आकर महिला ने जालसाजों के कहे अनुसार रकम जमा करा दी थी। यह पूरा मामला भोपाल सायबर क्राइम (Bhopal Cyber Crime) के पास 26 सितंबर, 2025 को पहुंच गया था। लेकिन, पुलिस इस मामले को कुछ दिन बाद ही जांच करके अगली कार्रवाई के लिए भूल गई। सायबर क्राइम को पुराने प्रकरणों की समीक्षा में यह केस डायरी मिली। जिसको गुपचुप तरीके से इसी महीने 2 सितंबर को डीसीपी जोन-2 विकास सहवाल (DCP Vikas Sehwal) के पास भेजा गया। वहां से केस डायरी छह दिन बाद गोविंदपुरा थाने को भेजी गई। यहां भी केस डायरी दो सप्ताह तक एफआईआर होने के लिए लटकी रही। गोविंदपुरा थाना पुलिस ने प्रकरण 854/26 दर्ज कर लिया है। भोपाल सायबर क्राइम ने आरोपियों के जिन खातों में पैसा ट्रांसफर हुआ था उसकी जानकारी जुटा ली है।
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