Bhopal Cop News: गैराज में मोपेड सुधारते वक्त आरोपी ने मार दी थी टक्कर, प्रकरण दर्ज कराने सौलह घंटे थाने में पीड़ित परिवार को जूझना पड़ा, घटना को जांच का विषय बताकर मामले को लटकाते रहे अफसर, सोशल मीडिया में वायरल हुई पीड़ा तो राजधानी के अफसर हुए सक्रिय

भोपाल। राजधानी के कमला नगर थाने में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा का एक मामला सामने आया है। घटना बेहद सामान्य थी लेकिन, थाने के कर्मचारियों ने जिस आचरण की प्रस्तुती की वह रसूख और सामान्य व्यक्ति की शक्ति को प्रदर्शित करती हैं। दूसरा चौंका देने वाला तथ्य यह भी है कि सौलह घंटे तक इस विडंबना से पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारी अनजान रहे। यह मामला भोपाल (Bhopal Cop News) शहर के कमला नगर थाना क्षेत्र का है। मामला गैराज में मोपेड सुधारने पहुंचे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (Makhanlal Chaturvedi National University Of Journalism And Communication ) के छात्र और उनके माता-पिता से हुई मारपीट से जुड़ा है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया में भी वायरल हुआ था।
मात़ा—पिता के साथ भी कांस्टेबल ने की मारपीट
घटनाक्रम की शुरुआत 05 अगस्त की रात दस बजे विवेकानंद पार्क (Vivekanand Park) से शुरु हुई थी। यहां 21 वर्षीय मोक्ष जैन (Moksh Jain) अपनी मोपेड एमपी-04-वायक्यू-9802 को सुधारने गए थे। तभी वहां इन्फील्ड सवार आर्यन सक्सेना (Aryan Saxena) आया और उसने मोपेड में टक्कर मार दी। मोक्ष जैन ने इस बात पर आपत्ति जताते हुए वाहन को सही तरीके से न चलाने पर विरोध जताया। वह अभद्रता और गाली-गलौज पर उतर आया। उसने फोन करके पिता अर्जुन सक्सेना (Arjun Saxena) और भाई विशाल सक्सेना (Vishal Saxena) को बुला लिया। वह दोनों अपने साथ पुलिस कांस्टेबल निकेश कुमार यादव (Constable Nikesh Kumar Yadav) को लेकर पहुंचे। तीनों ने मोक्ष जैन के साथ मारपीट शुरु कर दी। उसने भी फोन लगाकर पिता अवकाश जैन (Avkash Jain) और मां निधि जैन (Nidhi Jain) को बुला लिया। इसके बाद आरोपी आर्यन सक्सेना, विशाल सक्सेना, अर्जुन सक्सेना और निकेश कुमार यादव ने उससे मारपीट करते हुए मोबाइल (Mobile) भी छीन लिया। माता-पिता पहुंचे तो उनके साथ भी अभद्रता करते हुए मारपीट शुरु कर दी। मोक्ष जैन, उसके पिता अवकाश जैन और मां निधि जैन के साथ बुरी तरह से मारपीट की गई।
पुलिस आरक्षक को बचाना मकसद था

इस घटना को लेकर तीनों कमला नगर (Kamla Nagar) थाने में 05 अगस्त की रात साढ़े दस बजे पहुंचे। पुलिस को मोक्ष जैन ने अपनी पीछे की पूरी शर्ट को दिखाते हुए उसके साथ हुई बर्बर मारपीट बताई गई। माता-पिता ने भी अपने चोट के निशान दिखाए। थाने में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि मामला जांच का है। पहले यह पता लगाया जाएगा कि वास्तव में मारपीट हुई भी है या नहीं। प्रकरण को सान्हा में लेने की जानकारी देकर उन्हें जाने के लिए बोला गया। लेकिन, फिल्म पत्रकारिता के छात्र और उसके माता-पिता थाने में बिना कार्रवाई हुए जाने से इंकार कर दिया। परिवार ने हर घंटे का थाने में बकायदा वीडियो (Video) भी बनाया। थाने में मौजूद सारे कर्मचारी कुर्सी छोड़कर मुंशी के कमरे में जाकर बैठ गए। वहां बैठकर वे रील देख रहे थे। यह सारे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल किया गया।
परिवार तो थाने में अपनी मर्जी से बैठा था
पुलिस आयुक्त कार्यालय (Police Commissioner Office) के सोशल मीडिया में निगरानी रखने वाली टीम ने इस संबंध में अधिकारियों को बताया। जिसके बाद 06 अगस्त की दोपहर लगभग ढ़ाई बजे आरोपियों आर्यन सक्सेना, विशाल सक्सेना, अर्जुन सक्सेना और निकेश कुमार यादव के खिलाफ प्रकरण 390/26 दर्ज करके पीड़ित परिवार का मेडिकल परीक्षण जेपी अस्पताल (JP Hospital) में कराया गया। इस पूरी कवायद को शुरु करने में कमला नगर थाना पुलिस को सौलह घंटे लग गए। इस देरी को लेकर निगरानी करने वाले अफसरों ने किसी तरह की कार्रवाई भी नहीं की है। पीड़ित मोक्ष जैन ने बताया कि पुलिस थाने की तरफ से डंडा लेकर मारपीट करने वाले पुलिस आरक्षक को बचाने की योजना थी। जिस कारण हमें काफी देर तक परेशान होना पड़ा। पीड़ित परिवार को शंका है कि उनके मुखर होकर अपनी बात रखने पर उनके प्रकरण की केस डायरी में छेड़छाड़ की जा सकती है। इस मामले में सहायक पुलिस आयुक्त टीटी नगर संभाग अंकिता खातरकर (ACP Ankita Khatarkar) ने बताया कि जांच करने के लिए सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल रहे थे। पीड़ित परिवार को बता दिया गया था। लेकिन, परिवार अपनी स्वेच्छा से थाने में बैठा हुआ था। इसलिए किसी तरह की कार्रवाई को लेकर प्रश्न नहीं बनता है।
थानों में निगरानी व्यवस्था ध्वस्त
पूर्व पुलिस आयुक्त मकरंद देउस्कर ने आम नागरिकों से संवाद करके थानों की कार्रवाई और मासिक रिपोर्ट के आधार पर ग्रेडिंग देने की व्यवस्था बनाई थी। उनके बाद पूर्व पुलिस आयुक्त हरिनारायण चारी मिश्र ने क्यूआर कोड के जरिए फीडबैक की व्यवस्था बनाई। हालांकि वर्तमान में यह दोनों व्यवस्था की निगरानी करने वाले कर्मचारियों को दूसरे कामों में लगा दिया गया है।
केस डायरी में निर्णय नहीं लेते अफसर

थानों के अलावा पुलिस कमिश्नरेट में इस जोन से उस जोन का मामला बताकर कई प्रकरणों के पीड़ित थानों के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे ही एक स्नूकर खेलने वाले युवक के साथ मोबाइल बेचने के नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ। उनका प्रकरण पहले अवधपुरी (Awadhpuri) थाने वहां से अरेरा हिल्स (Arera Hills) फिर उसके बाद तलैया (Tallaiya) थाने भेज दिया गया। इस पूरी कवायद में नौ महीने बीत गए। इसके बावजूद स्नूकर खेलने वाले खिलाड़ी की समस्या का अब तक कोई समाधान ही नहीं हुआ। ऐसे ही दर्जनों मामले प्रतिदिन थानों में पुलिस आयुक्त कार्यालय से फटकार के बाद थानों में दर्ज हो रहे हैं। इन मामलों में सायबर फ्रॉड, जालसाजी से लेकर नाबालिगों के लिए बने पॉक्सो एक्ट जैसे मामले भी शामिल हैं।
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