Bhopal Double Murder: आठ मिनट के भीतर डबल मर्डर केस का सौलह दिन बाद भी सुराग नहीं

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Bhopal Double Murder: प्रॉपर्टी डिस्प्यूट बताकर सड़क पर उतरी अफसरों की फौज की लापरवाहियां होने लगी उजागर, सट्टे और कट्टे की बात को नजर अंदाज करना पड़ा महंगा, मर्डर से दो सप्ताह पूर्व शकुंतला का मोबाइल हुआ था चोरी, पति हेमंत हर दो महीने में बदल लेते थे मोबाइल और नंबर

Bhopal Double Murder
ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

भोपाल। कपल डबल मर्डर को योजनाबद्ध तरीके से घर में घुसकर दो बदमाशों ने महज आठ मिनट के भीतर उसे अंजाम दिया था। आरोपियों ने एक—एक करके चार गोलियां दंपति को मारी थी।यह मामला भोपाल (Bhopal Double Murder) शहर के ऐशबाग इलाके का है। इस मामले की जांच कर रही एसआईटी की लापरवाहियां सौलह दिन बाद उजागर होने लगी हैं। दरअसल, जांच की शुरुआती बिंदु ही अफसरों की फौज ने गलत चुन लिया। मरने वाले रेलवे से रिटायर्ड हेमंत फिलेमोन सट्टा खेलते थे। इसके अलावा उनके पास एक कट्टा भी सुरक्षा के लिए होता था। इन दोनों ही तथ्यों को अफसरों ने शुरु से नजर अंदाज कर दिया।

हर दूसरे महीने में अपना मोबाइल फोन बदलते थे फिलेमोन

ऐशबाग (Aishbag) थाना पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि कस्तूरबा अस्पताल (Kasturba Hospital) की पूर्व नर्स शकुंतला बारीक (Shakuntala Barik) का मर्डर से दो सप्ताह पूर्व मोबाइल (Mobile) भी चोरी गया था। उनका और उनके पति हेमंत फिलेमोन (Hemant Philemon) का मोबाइल में मौजूद डेटा आरोपियों ने पूरी तरह से डिलीट कर दिया है। हेमंत फिलेमोन का मोबाइल कजलीखेड़ा (Kaklikheda) में मिला है। जबकि शकुंतला बारीक का 10 जून को चोरी गए मोबाइल की गोविंदपुरा (Govindpura) थाना पुलिस ने कार्रवाई भी नहीं की है। हेमंत फिलेमोन हर दूसरे महीने में अपना मोबाइल फोन और उसका नंबर बदलने का काम करते थे। पति के मोबाइल पर लाखों रुपए के ट्रांजेक्शन भी मिले हैं। लेकिन, पत्नी लोगों से उधार मांगती थी। इसलिए साफ है कि दोनों के बीच आर्थिक समस्याओं को लेकर कलह की भी बात सामने आई है। इसके अलावा पुलिस के अधिकारियों ने उनके डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कॉलोनी (Dr. Bhimrao Ambedkar Colony) में रहने वाले पुराने किराएदारों की सुध ही नहीं ली। जबकि दंपति किराएदारों को रखने से पूर्व उनकी तमाम जानकारियां थाने को देता था। यह सारी कमजोरियां धीरे—धीरे उजागर होने लगी तो मामले की जांच कर रही एसआईटी ने उनकी भाभी शिबानी बारीक (Shivani Barik) और भाई विनोद बारीक (Vinod Barik) को टारगेट करना शुरु कर दिया। पुलिस ने उन्हें संपत्ति विवाद के चलते संदेही बताकर दबाव बनाने और गुनाह को कबूलने एक पखवाड़े तक सुबह—शाम कभी भी थाने, क्राइम ब्रांच (Crime Branch) बुलाकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया।

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कुछ इस तरह से मारी गई थी गोलियां

Bhopal Double Murder
मृतक शकुंतला बारीक और उनके पति हेमंत फिलेमोन

पुलिस को शुरुआती जांच में पता चला है कि सबसे पहले शकुंतला बारीक के सीने में गोली मारी गई। ​इसके बाद उनके पति बिस्तर से उठकर भागने लगे तो उनके सिर के पिछले हिस्से को टारगेट करके गोली मारी गई। आरोपियों ने शकुंतला की पूरी तरह मौत की पुष्टि कर सिर में भी गोली मारी। इसी तरह चौथी गोली हेमंत फिलेमोन के छाती में मारी गई थी। पुलिस को तीन खाली खोखे घर पर मिले हैं। जबकि चौथा खोखा आज तक नहीं मिला है। यह सबकुछ आरोपियों (Bhopal Double Murder) ने महज आठ मिनट के भीतर अंजाम दिया। दंपति दोनों आरोपियों को जानते थे और उन्हें भीतर प्रवेश भी दिया। वारदात 24 जून की रात आठ बजे से साढ़े आठ बजे के बीच अंजाम दी गई थी। क्योंकि उनके घर में रहने वाले छात्रों ने शाम सात बजे तक हेमंत को गलियारे में टहलते देखा था।

पूरे घर में जाकर परिवार को बुलाकर की गई छानबीन

घर पर कट्टा मिलने की बात उजागर न हो इसलिए भाई—भाभी पर दबाव बनाया गया। शिबानी बारीक से जबरिया हस्ताक्षर यह बोलकर कराए गए कि उनके सामने कट्टा मिला। जबकि यह कट्टा उनके सामने पुलिस ने एक सप्ताह बाद दिखाते हुए बरामद होना बताया था। इस लापरवाही पर अफसरों की टीम ने नए सिरे से पूरे घर की छानबीन करके सारे दस्तावेज, कपड़े, सभी कमरों के एक—एक हिस्से के अलावा किचन में भी जाकर छानबीन की हैं। इसके बावजूद (Double Murde) में पुलिस के पास अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं है। पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज मिला है जिसमें दिखाई दे रहे संदिग्ध को वह आरोपी मानकर जांच कर रही है।

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भाई—भाभी भी बोले पुलिस की जांच ही गलत

इस पूरे हत्याकांड को सुलझाने शकुंतला के छोटे भाई विनोद बारीक और उनकी कस्तूरबा अस्पताल में नौकरी करने वाली पत्नी शिबानी बारीक निशाने पर रही। इतना ही नहीं विनोद बारीक के दामाद और उनके पिता को भी पुलिस ने संदेही मान लिया। पिता—पुत्र की कदकाठी सीसीटीवी में दिख रहे संदेहियों से मेल खाना बताया गया। विनोद बारीक के समधी भारतीय सेना से Retired हैं और उन्हें कारगिल युद्ध के दौरान गोली भी लगी हैं। वे भी पुलिस के रवैये से काफी आहत और निराश हैं। परिवार का दावा है कि पुलिस की जांच गलत दिशा में हैं। उनके पास कोई ऐसे तथ्य नहीं हैं जो साबित कर सके कि जांच में कामयाबी मिलेगी। सिर्फ विनोद, उनकी पत्नी शिबानी, इंदौर में रहने वाले बेटे, पत्नी तक यह मामला सिमटा रखा है। हेमंत और शकुंतला दोनों की दो—दो शादियां हैं। पुलिस ने इस संबंध में कोई ठोस पड़ताल ही नहीं की। जबकि इस विषय को लेकर परिवार पहले ही दिन पुलिस को सारी जानकारी मुहैया करा चुका था।

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