Bhopal Digital Arrest: दो महीने तक वृद्ध दंपति को डिजीटल अरेस्ट रखा, आश्रम से निकलकर घर पहुंचाया, सोना गिरवी रखकर जालसाजों के बताए खाते में जमा कराई रकम

भोपाल। राजधानी में एक दंपति को सायबर जालसाजों ने लगभग दो महीने तक डिजीटल अरेस्ट रखा। यह मामला भोपाल (Bhopal Digital Arrest) शहर के कोलार रोड थाना क्षेत्र का है। इस दौरान थाना भी वीडियो कॉल से दिखाकर उन्हेंं दहशत में डाला गया। इसके बाद सीआईडी अधिकारी और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बनकर दंपति को दोषी करार देते हुए खाते में 22 लाख रुपए जमा कराने के आदेश दिए गए। दहशत में आए दंपति वारदात होने के एक महीने तक सदमे में रहे। जिस कारण पुलिस के पास मामला देरी से पहुंचा।
पहले बीमारी पूछी फिर वयोवृद्ध होने पर थाने की बजाय वीडियो कॉल पर जांच का झांसा दिया
कोलार रोड (Kolar Road) थाना पुलिस के अनुसार सुवर्णा लक्ष्मी (V) पति नरसिम्हा राव उम्र 65 साल के पास जालसाजों का पहला फोन 19 मई को आया था। उस वक्त वे महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh) के पलनाडू जिले में स्थित शिवगुरु आश्रम (Shivguru Ashram) में मौजूद थे। फोन करने वाले व्यक्ति ने दिल्ली (Delhi) के दरियागंज (Dariyaganj) थाने का पुलिस अधिकारी खन्ना बताया। आरोपी ने धनशोधन के मामले में गिरफ्तारी वारंट से अवगत कराया। आरोपी का कहना था कि उनके दिल्ली में स्थित केनरा बैंक (Canara Bank) खाते से करोड़ों रुपए का लेनदेन नरेश गोयल (Naresh Goyal) के खाते में हुआ है। उन्होंने यह बात निजी कंपनी से रिटायर्ड पति नरसिम्हा राव (Narsimha Rao) को बताई। आरोपी ने उनसे भी बात करने के बाद गिरफ्तारी वारंट में संपूर्ण जानकारी भरकर देने के लिए बोला। इसमें वृद्ध दंपति की बीमारी की जानकारी भी शामिल थी। जानकारी पढ़ने के बाद जालसाजों ने झांसा दिया कि उन्हें काफी गंभीर बीमारी है। इसलिए जांच से लेकर सभी न्यायिक प्रक्रिया वीडियो कॉल के माध्यम से होगी।
कई तरह की बातें बनाकर घंटों उलझाए रखते थे

आरोपियों ने इसके बाद व्हाट्स एप पर एक कागज भेजा जिसमें उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में आवेदन करने का उसे आवेदन बताया। इस दौरान जालसाजों ने वृद्ध दंपति को थाना भी दिखाया। जिसमें कई पुलिस कर्मचारी थे जो वर्दी पहनकर वहां काम कर रहे थे। यह वीडियो कॉल (Video Call) इमो एप के जरिए किया गया था। वृद्ध दंपति से कहा गया कि अब वे डिजीटल अरेस्ट (Digital Arrest) हैं। परिवार मूलत: आंध्रप्रदेश का रहने वाला है। लेकिन, उनका घर जहां दस्तावेज, बैंक और जेवरात कोलार रोड (Kolar Road) स्थित बीमा कुंज के पास कृष्णा काम्पलेक्स (Krishna Complex) में रखे थे। यह जालसाजों को बताया गया तो उन्होंने सुवर्णा लक्ष्मी राव से कहा कि उनका प्रकरण काफी संवेदनशील होने के कारण गोपनीय है। इसलिए नरेश गोयल से उनको जान का खतरा बताकर मदद का भरोसा दिलाया। इसके बाद निशा पटेल का पति के पास फोन आया था। कई आरोपी घंटों तक कई तरह का झांसा देकर वृद्ध दंपति (Bhopal Digital Arrest) से दिनभर बात करके उन्हें उलझाए रखते थे। निशा पटेल नाम की महिला ने बताया कि उनका प्रकरण उच्चतम न्यायालय में भेज दिया गया है। अगली पेशी न्यायालय में न्यायाधीश के समक्ष होगी। उन्हें वीडियो कॉल पर लिया गया। न्यायाधीश कोई दिखाई नहीं दिया। लेकिन, वृद्ध दंपति और उन पर लगे आरोपों को लेकर बातचीत होती रही। इसके बाद न्यायाधीश ने आरोपों को लेकर वृद्ध दंपति से पक्ष जाना। उन्होंने बताया कि वे नरेश गोयल को जानते ही नहीं हैं। इसके अलावा केनरा बैंक में उनका खाता भी नहीं है। यह सुनने के बाद फर्जी न्यायाधीश ने कहा कि उनके पास 22 मिनट बातचीत का रिकॉर्ड मौजूद हैं। इसलिए संपति जब्त करने और सोना-चांदी गिरवी रखकर और एफडी तुड़वाकर 22 लाख रुपए जमा करने का आदेश नहीं मानने पर फर्जी पुलिस को भोपाल जाकर गिरफ्तारी करने का आदेश दिया। निशा पटेल (Nisha Patel) ने फोन करके कहा कि भोपाल जाकर सभी कार्रवाई तुरंत करें। जिसके बाद वृद्ध दंपति भोपाल आए और ओसमान इंटरप्राइजेज (Osman Enterprises) के खाते में पैसा जमा कराया। इसके लिए उन्होंने घर में रखे सारे जेवरात गिरवी रखकर लोन भी लिया। यह जेवरात उन्होंने दस साल चलाए किंडर गार्डन स्कूल की कमाई से बचाकर खरीदे थे। कोलार रोड थाना पुलिस ने प्रकरण 524/26 दर्ज कर लिया है।
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