Bhopal Cop News: पांच महीने पहले रिश्वत लेकर जमानत देने आरोप लगाकर अधिवक्ता ने मुख्य सचिव से लेकर डीसीपी तक की थी शिकायत, सीपी ने गुप्त जांच बैठाई, एडीसीपी से मांगी एक सप्ताह में रिपोर्ट

भोपाल। राजधानी की एसीपी अदिति भावसार (ACP Aditi Bhawsar) सक्सेना एक बार फिर विवादों में आ गई है। दरअसल, उनका नाम लेकर भोपाल (Bhopal Cop News) शहर के गोविंदपुरा थाने की गुंडा सूची में शामिल बदमाश गोपाल पाटील ने एक अधिवक्ता को फोन पर धमकाया है। यह वहीं अधिवक्ता है जिन्होंने पांच महीने पहले एसीपी के खिलाफ बेल के बदले ब्राइब यानि जमानत के बदले रिश्वत मांगने के संगीन आरोप लगाए थे। इन्हीं शिकायतों को वापस लेने गोपाल पाटील ने एसीपी को ‘अपनी बड़ी बहन’ बताकर धमकी अधिवक्ता (Advocate) को दी है। यह पूरा मामला डीजीपी कैलाश मकवाना (DGP Kailash Makwana) के अलावा पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के पास पहुंच चुका है। पुलिस आयुक्त ने भारतीय पुलिस सेवा की महिला अधिकारी मिनी शुक्ला जो एडीशनल डीसीपी हैं उन्हें गोपनीय जांच करने के आदेश भी दे दिए हैं।
यह है पूरा मामला जिसके लिए एसीपी को गुंडे की मदद लेनी पड़ी
पुलिस कमिश्नर प्रणाली में अभी एसीपी कार्यालय में छोटे मामलों जैसे प्रतिबंधात्मक कार्रवाई पर जमानत देने या जेल भेजने का आर्डर जारी होता है। इन्हीं मामलों को लेकर पैरवी करने वाले अधिवक्ता बनवारी शर्मा (Advocate Banwari Sharma) ने अप्रैल, 2026 में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने तीन व्यक्तियों को जेल और एक व्यक्ति को जमानत देने के मामले में संगीन आरोप लगाए थे। प्राथमिक जांच के बाद तत्कालीन डीसीपी रहे विवेक सिंह (DCP Vivek Singh) ने एसीपी कार्यालय में पदस्थ अवतार सिंह (Awtar Singh) को लाइन अटैच कर दिया था। इसी प्रकरण की जांच चल रही है जिसमें अधिवक्ता की तरफ से पुख्ता सबूत पेश करने पर सहायक पुलिस आयुक्त घिरती नजर आ रही है। जांच लगभग अंतिम दौर में आ चुकी हैं। जिसमें दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
एक ही कमरे में बैठकर फोन लगाने का आरोप

अब अधिवक्ता बनवारी शर्मा को 17 सितंबर की शाम लगभग साढ़े सात बजे गोविंदपुरा (Govindpura) थाने की गुंडा सूची में शामिल बदमाश गोपाल पाटील (Gopal Patil) ने व्हाट्स एप पर कॉल लगाया। उसने फोन करके अधिवक्ता को अपरोक्ष रुप से धमकाया कि यदि वह शिकायत को वापस नहीं लेता हैं तो वह एसीपी कार्यालय के सामने खड़े नहीं रह सकता। इसके अलावा एसीपी को अपनी बड़ी बहन बताकर आमने—सामने मुलाकात करके समझौता करने का भी प्रस्ताव दिया गया। बातचीत की यह रिकॉर्डिंग और पुलिस कमिश्नर को की गई शिकायत हमारे पास मौजूद हैं। गोपाल पाटील के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक मारपीट और गुंडई करने के मामले दर्ज है। अन्ना नगर (Anna Nagar) इलाके में उसके नाम पर जगह—जगह बैनर पोस्टर भी लगे रहते हैं। उनमें विधायक की तस्वीर भी है। पुलिस ने जब भी उसके खिलाफ कार्रवाई करने का प्रयास किया तो विधायक का फोन आया है। खादी के साथ अब खाकी से सांठगांठ उजागर होने के बावजूद जिम्मेदार अफसर अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।
भ्रष्टाचार के दंश में घिरती महिला अधिकारी
कटनी (Katni) के डीएसपी रही नेहा पच्चीसिया (DSP Neha Pachisia ) अभी भी फरार हैं। वह 92 लाख रुपए की रिश्वत मांगने के आरोपों से घिरी है। ऐसे ही रिश्वत लेते कई अन्य महिलाएं रंगे हाथों लोकायुक्त पुलिस के हाथ लग चुकी है। सर्वाधिक संख्या इंदौर (Indore) जिले की है। पिछले दो साल के भीतर में इनकी संख्या दो दर्जन से अधिक हो चुकी है। जिसमें इंदौर की जिला परियोजना अधिकारी शीला मरावी (Sheela Maravi) , प्राचार्य मनीषा पहाड़िया (Manisha Pahadiya), पटवारी प्रियंका ठाकुर (Priyanka Thakur), अंजली मोहे (Anjali Mohe), पटवारी भारती राजपूत (Bharti Rajput) , बाबू रत्ना प्रेम पवार(Ratna Prem Pawar), पटवारी कला भट्ट (Kala Bhatt), संध्या पथरोड (Sandhya Pathrod) , ग्वालियर (Gwalor) जिले में पटवारी रेखा शाक्य (Rekha Shakya) , सरपंच केशवती कोली (Keshwati Koli) सागर जिले में गंधाली कदम फ्रांसिस, जबलपुर (Jabalpur) जिले में प्रीति ठाकुर (Preeti Thakur), आरटीओ आरक्षक श्वेता अहिरवार (Shweta Ahirwar) , रीवा (Rewa) जिले में नेहा सिंह (Neha Singh) , उज्जैन जिले में हिमांगिनी शर्मा (Himangini Sharma) रिश्वत लेते लोकायुक्त पुलिस (Lokayukta Police) के हाथों लग चुकी है। इसी तरह भोपाल (Bhopal) में निर्मला निकोसे (Nirmala Nikose), सुरेखा सराफ (Surekha Saraf , निशा अचले (Nisha Achle) और अर्शी खान (Arshi Khan) के मामले काफी चर्चा में रहे थे।
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