MP Ayushman Scam: मारुति मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल की धांधली औचक निरीक्षण के बाद उजागर, मृत व्यक्ति का चल रहा था इलाज, महिला को खून नहीं चढ़ाया लेकिन उसे दिखाया गया

भोपाल। आयुष्मान भारत निरामयम योजना (Ayushman Bharat Niramayam Scheme) के तहत अनुदान लेने वाले अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। जिसमें मारुति मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल में भारी धांधली उजागर हुई। मृत मरीज को अस्पताल में भर्ती दिखाकर इलाज किया जा रहा था। वहीं एक महिला को दो यूनिट खून चढ़ाने का खुलासा था। लेकिन, चिकित्सक से पूछा तो उन्होंने इंकार कर दिया। मामले को आपराधिक मानते हुए यह पूरा मामला भोपाल शहर के पिपलानी थाने को भेज दिया गया। जिसमें अस्पताल संचालक के खिलाफ जालसाजी का प्रकरण दर्ज किया गया।
मौत के बाद भी चल रहा था इलाज
पिपलानी (Piplani) थाना पुलिस के अनुसार इस संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन क्षेत्रीय अधिकारी डॉक्टर रविन्द्र गुप्ता (Dr Ravindra Gupta) ने पुलिस को दी है। जिसमें बताया गया है कि आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत लाभ लेने वाले मारुति मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल (Maruti Multi-Specialty Hospital) में 23 अगस्त को औचक निरीक्षण करने टीम पहुंची थी। यह अस्पताल वर्धमान कॉलोनी (Wardhman Colony) में चलता है। सामान्य मरीज कौशल्या पाल (Kaushalya Pal), हरीचरण को गंभीर बीमारी बताकर आईसीयू में भर्ती किया गया था। जिनका इलाज अस्पताल में इंटर्नशिप करने आए निशांत महावत (Nishant Mahawat) कर रहे थे। अस्पताल में एक भी एमबीबीएस डिग्री वाला डॉक्टर नहीं मिला। वहां बीएचएमएस डॉक्टर हेमंत सेन (Dr Hemant Sen) मिले। मरीजों के डिस्चार्ज सर्टिफिकेट का निरीक्षण किया गया तो वह डॉक्टर मुस्कान रघुवंशी (Dr Muskan Raghuvanshi) के हस्ताक्षर से छुट्टी करना बताया गया। जबकि डॉक्टर अवकाश पर थीं। अस्पताल ने एक संस्था से सुविधाओं को लेकर करार किया था। यह अनुबंध जुलाई, 2026 में ही समाप्त हो गया था। अस्पताल की निगरानी करने वाले टीएमएस पोर्टल पर भर्ती मरीजों की संख्या 23 दिखाई जा रही थी। जबकि अस्पताल के भीतर 11 मरीज थे। जांच में पाया गया कि मरीज मेहरबान ठाकुर (Meharban Thakur) की मौत हो गई थी। लेकिन, टीएमएस पोर्टल पर उनका इलाज चल रहा था। इसके अलावा दीपक धानक (Deepak Dhanak) और सूरज बाई (Suraj Bai) अस्पताल के रिकॉर्ड में डिस्चार्ज मिले। जबकि वे अस्पताल में भर्ती मिले। सूरज बाई को दो यूनिट खून चढ़ाने की जानकारी दिखाई गई। उन्हें खून चढ़ाने वाले चिकित्सक डॉक्टर अपूर्व कटारे (Dr Apurva Katare) ने इस बात से इंकार कर दिया। तमाम लापरवाहियों को देखते हुए सरकार की तरफ से मिलने वाले अनुदान को निलंबित करके पिपलानी थाने को मामला भेजा गया। जिसमें प्रतिवेदन के आधार पर 01 सितंबर को अस्पताल की संचालक भवानी रघुवंशी (Bhawani Raghuvanshi) के खिलाफ प्रकरण 902/26 दर्ज कर लिया गया।
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