Bhopal Property Fraud: सुप्रीम कोर्ट के स्टे आर्डर और ईओडब्ल्यू में दर्ज एफआईआर की जानकारी छुपाकर दिया वारदात को अंजाम,पति—पत्नी ने बयाने में लिए डेढ़ करोड़ रुपए हड़पे, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

भोपाल। राजधानी की पॉश अरेरा कॉलोनी में स्थित ‘लाल बंगला’ (Lal Bangla) एक बार फिर साढ़े दस करोड़ रुपए बिकने जा रहा था। जिसके लिए बकायदा डेढ़ करोड़ रुपए का बयाना भी दे दिया गया। यह रकम बैंक आफ महाराष्ट्र से वन टाइम सैटलमेंट (Bhopal Property Fraud) के नाम पर पति—पत्नी ने वसूल ली। ऐसा करते वक्त उन्होंने प्रॉपर्टी खरीद रहे वास्तविक मालिक से जुड़े दो मामलों को छुपाया। जब इस बात की भनक पीड़ित को लगी तो उन्होंने रकम मांगी। जिस कारण हुए विवाद के बाद यह मामला हबीबगंज थाने में पहुंचा। जिसमें पुलिस की तरफ से तीन दिन पहले गुपचुप जालसाजी का प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
संपत्ति को अपनी बताकर बैंक आफ महाराष्ट्र से तीन करोड़ रुपए का लिया लोन
जानकारी के अनुसार अरेरा कॉलोनी (Arera Colony) में स्थित ई—2 में बंगला नंबर 28 लाल कोठी (Lal Kothi) के नाम से चर्चित हैं। यह बंगला कॉर्नर में होने और भाजपा कार्यालय(BJP Office) के पास प्राइम लोकेशन में रहने के कारण कई पूंजीपतियों की इसमें नजर हैं। इस बंगले में मालिकाना हक को लेकर रुपेश अग्रवाल (Rupesh Agrawal) और उनकी बहन मल्लिका गर्ग के बीच विवाद है। जिसमें मल्लिका गर्ग (Mallika Garg) ने उक्त संपत्ति को अपनी बताकर बैंक आफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) से तीन करोड़ रुपए का लोन ले लिया था। इस मामले में भोपाल ईओडब्ल्यू (Bhopal EOW) ने 4 फरवरी, 2022 को जालसाजी का प्रकरण दर्ज किया है। जिसमें तत्कालीन बैंक मैनेजर सहज पाठक (Sahaj Pathak) , मल्लिका गर्ग और उनके पति अंकुर गर्ग (Ankur Garg) को आरोपी बनाया गया है। यह प्रकरण अभी भी विचाराधीन है। इस मामले में शिकायत मल्लिका गर्ग की ननद पारुल अग्रवाल (Parul Agrawal) ने की थी। वे शहर की काफी प्रतिष्ठित महिला भी है। लोन लेने के लिए मूलत: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) में रहने वाली मल्लिका गर्ग और उनके पति अंकुर गर्ग ने भोपाल के अरेरा कॉलोनी में स्थित लाल कोठी के पते पर सारा फर्जीवाड़ा किया था। जब दंपति लोन ले रहा था तभी दीवानी मामला चल रहा था। इसके बावजूद बैंक ने तीन करोड़ रुपए का लोन मंजूर कर दिया था। लोन से मिली राशि प्रेम चावला (Prem Chawla) सुधेश चावला के खातों में ईओडब्ल्यू ने जाना बताया था। लेकिन, संदिग्ध गतिविधियों के बावजूद प्रकरण में उन्हें क्लीनचिट मिल गई थी। ईओडब्ल्यू ने इस प्रकरण में अभियोग पत्र भी दाखिल कर दिया है। जबकि इस लेन—देन को लेकर ईडी में भी मनी लांड्रिंग की जांच विचाराधीन है। अब इसी संपत्ति का सौदा मल्लिका गर्ग और उनके पति अंकुर गर्ग ने साढ़े दस करोड़ रुपए में कर लिया। यह सौदा शिवशंकर गोयल (Shivshankar Goyal) के साथ किया गया। वे ई—4/149 अरेरा कॉलोनी में रहते हैं और ठेकेदारी का काम करते हैं। गोयल का सड़क बनाने का काम है। दंपति ने बैंक में बंधक प्रॉपर्टी में सैटलमेंट करने के नाम पर उनसे अगस्त, 2019 से लेकर दिसंबर, 2019 के बीच एक करोड़, 49 लाख रुपए चार किस्त में ले लिए थे। जबकि इस संपत्ति को नीलाम करने और बेचने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अप्रैल, 2019 में ही स्टे आर्डर जारी था। इस आदेश से पति—पत्नी भी वाकिफ थे। इसी तरह जबलपुर स्थित डीआरटी से जुलाई, 2017 में भी प्रकरण लंबित हैं। यह पता चलने पर शिव शंकर गोयल पिता स्वर्गीय चिरंजी लाल गोयल उम्र 78 साल ने हबीबगंज (Habibganj) थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें हबीबगंज थाना पुलिस ने 12 जून को जालसाजी का प्रकरण 372/26 दर्ज कर लिया है। बंगला बिकवाने में विजय गुप्ता (Vijay Gupta) ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी। पुलिस ने बैंक से हुए लेन—देन और एग्रीमेंट के आधार पर यह प्रकरण दर्ज किया है।
खबर के लिए ऐसे जुड़े

हमारी कोशिश है कि शोध परक खबरों की संख्या बढ़ाई जाए। इसके लिए कई विषयों पर कार्य जारी है। हम आपसे अपील करते हैं कि हमारी मुहिम को आवाज देने के लिए आपका साथ जरुरी है। हमारे www.thecrimeinfo.com के फेसबुक पेज और यू ट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें। आप हमारे व्हाट्स एप्प न्यूज सेक्शन से जुड़ना चाहते हैं या फिर कोई घटना या समाचार की जानकारी देना चाहते हैं तो मोबाइल नंबर 7898656291 पर संपर्क कर सकते हैं।