Delhi-NCR Pollution : सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहीं ये 10 बड़ी बातें

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धुआं-धुआं दिल्ली पर सियासी बुखार, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण (Delhi-NCR Pollution) की वजह से जीना मुश्किल हो गया है। दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए किए गए केंद्र और राज्य सरकार के तमाम दावों की पोल खुल गई ऐ। एक तरफ दिल्ली गैस चेंबर (Gas Chamber) बन गई है, तो दूसरी तरफ नेताओं पर सियासी बुखार चढ़ा हुआ है। आम आदमी पार्टी और भाजपा नेता एक दूसरे को दोषी बता रहे है। वहीं प्रदूषण के इस मामले में सियासत पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है।
 1- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “ये तरीका ठीक नहीं है कि केंद्र को करना चाहिए था या राज्य को करना चाहिए था। इस शहर में ऐसा कोई कमरा नहीं जहां रहा जा सके। प्रदूषण की वजह से हम जीवन के बहुमूल्य वर्ष खो रहे है”
2- ‘स्थिति गंभीर है, आप केंद्र और दिल्ली के रूप में क्या करना चाहते हैं? इस प्रदूषण को कम करने के लिए आप क्या करने का इरादा रखते हैं?  सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा से भी कहा है कि वे जलते हुए कचरे को कम करें।
3- ‘हमारी नाक के नीचे हर साल यहीं हो रहा है। लोगों को दिल्ली नहीं आने, या दिल्ली छोड़ने की सलाह दी जा रही है। राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं। लोग अपने राज्य और पड़ोसी राज्यों में मर रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम हर चीज का मखौल बना रहे हैं।
4- जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि “कारें कम प्रदूषण पैदा करती हैं। इस ऑड-ईवन से आपको (दिल्ली) क्या मिल रहा है?
5- जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा- राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब करेंगे ग्राम प्रधानों, स्थानीय अधिकारियों, पुलिस, जो जलने पर नियंत्रण नहीं करते हैं,  उनको पदों से हटा दिया जाना चाहिए।
6- न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने दिल्ली सरकार से कहा – विषम-सम-विषम योजना के पीछे तर्क क्या है? डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाना हम समझ सकते हैं, लेकिन ऑड-ईवन स्कीम की से क्या होगा।

7- यह जीवन के मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन है। विभिन्न राज्य सरकारें और नागरिक निकाय अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को तलब किया पराली जलाने और प्रदूषण के मुद्दे पर पेश होने के लिए बुलाया।

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8- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि वह विशेषज्ञों की मदद से कदम उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वह शुक्रवार तक डेटा या रिकॉर्ड यह साबित करे कि ऑड-ईवन स्कीम से दिल्ली में प्रदूषण कम हुआ है।

9- सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में निर्माण और विध्वंस पर प्रतिबंध का उल्लंघन करते पाए जाने वाले व्यक्तियों पर 1 लाख रुपये और कचरा जलाने पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। कोर्ट नगर निकायों को कचरे के खुले डंपिंग को रोकने का भी निर्देश देता है।

10- सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोई बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी डीजल जनरेटर का उपयोग न किया जाए। राज्यों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति आज बैठक करेगी और रिपोर्ट 6 नवंबर को सौंपेंगी।

प्रदूषण के मामले में सर्वोच्च न्यायालय 6 नवंबर को सुनवाई करेगा।

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