Bhopal Cop News: डीसीपी जोन 2 की विभागीय जांच के बाद राजधानी के एक और पुलिस अधिकारी पर अनुशासन का चाबुक चला, थानों में जांच अधिकारियों और बल की कमी बन रही चुनौती

भोपाल। राजधानी की पुलिस व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने पुलिस कमिश्नर संजय कुमार लगातार प्रशासनिक सर्जरी कर रहे हैं। लापरवाही और अमर्यादित आचरण पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कमिश्नर (Bhopal Cop News) ने एक बार फिर बड़ा एक्शन लेते हुए मिसरोद थाना के निरीक्षक रतन सिंह परिहार (Ratan Singh Parihar) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इससे पहले जोन 2 उपायुक्त विकास सहवाल ने आरोपों की विभागीय जांच की थी।
आदिवासी समाज के प्रति की अभद्र टिप्पणी
जानकारी के अनुसार 13 अक्टूबर की शाम रोशनपुरा (Roshanpura) में जयस संगठन के युवाओं का प्रदर्शन चल रहा था। उस दौरान कुछ युवा बैरिकेड पर चढ़कर सीएम हाउस (CM House) की तरफ जाने का प्रयास कर रहे थे। इस कारण उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए अधिग्रहण किये वाहन में बैठा दिया। इसी दौरान निरीक्षक ने आदिवासी समाज के प्रति अभद्र टिप्पणी कर दी थी। मामले की शिकायत मिलते ही कमिश्नर संजय कुमार (Police Commissioner Sanjay Kumar) ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल उपायुक्त को जांच करके कार्रवाई के साथ रिपोर्ट कार्यालय को भेजने का आदेश दिया था। कमिश्नर कार्यालय का स्पष्ट कहना है कि पुलिस का काम सभी वर्गों की सुरक्षा और सम्मान करना है, किसी भी समुदाय के प्रति अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे और कड़ी कार्रवाई होगी।
थानों में आईओ की भारी कमी
कमिश्नर की इस सख्ती के बीच राजधानी के थानों की जमीनी हकीकत भी चिंता बढ़ा रही है। सूत्रों के मुताबिक शहर के अधिकांश थानों में जांच अधिकारियों की भारी कमी है। स्थिति यह है कि एक-एक सब इंस्पेक्टर के पास दर्जनों केसों की विवेचना लंबित है। स्टाफ की कमी के चलते प्रकरण से लेकर चालान पेश करने तक की प्रक्रिया धीमी हो रही है। जिसका सीधा असर पीड़ितों को न्याय मिलने में हो रहा है। कई थानों में प्रधान आरक्षकों को भी विवेचना का जिम्मा देना पड़ रहा है। जिस कारण मैदान की निगरानी प्रणली ध्वस्त है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार इस कमी को दूर करने के लिए लगातार रोस्टर में बदलाव और थानों में बल के पुनर्वितरण की कवायद में जुटे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में निलंबन और लाइन अटैच के साथ-साथ थानों में नए जांच अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर भी बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हो सकता है।
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