MP Cop News: निगरानी गुंडे और आदतन बदमाशों की मांगी गई जानकारी उनकी व्यक्तिगत विषय से जुड़ी है इसलिए उसे उजागर नहीं किया जा सकता: भोपाल पुलिस
केस—1
कजलीखेड़ा (Kajlikheda) थाने के निगरानी बदमाश फुरकान खान (Furkan Khan) की शादी में पुलिस वर्दी पहनकर एसआई श्रीकांत द्विवेदी (SI Shrikant Diwedi) और एएसआई कल्याण रघुवंशी (ASI Kalyan Raghuvanshi) पहुंचे थे। यह तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हुई तो 6 अक्टूबर को डीसीपी आदर्शकांत शुक्ला (DCP Adarshkant Shukla) ने पुलिस रैग्युलेशन के पैरा—64 का हवाला देकर उन्हें सीधे निलंबित कर दिया।
केस—2
रातीबड़ (Ratibarh) इलाके में 10—11 सितंबर की दरमियानी रात बिल्डर संतोष सिंह तोमर (Santosh Singh Tomar) के घर एक—एक करके 11 गोलियां चलाई गई। इस मामले के आरोपी नीतेश ठाकुर (Nitesh Thakur) को दिल्ली एयरपोर्ट से दबोचा गया। उससे हुई पूछताछ के बाद पता चला कि वह वारदात के बाद बागसेवनिया (Bagsewania) स्थित बेस्टियन होटल (Bastian Hotel) में पहुंचे थे। उसी होटल में जाते हुए आरक्षक सत्यभान गुर्जर (Con Satyabhan Gurjar) सामने आया। जिसको पुलिस उपायुक्त जोन—1 ने तत्काल निलंबित का आदेश थमा दिया।
एआई से निर्मित सांकेतिक चित्र।
भोपाल। आपको यह दो प्रकरण से अहसास हो रहा होगा कि राजधानी में कानून का राज है। लेकिन, यह आपकी गलतफहमी हैं। दरअसल, यह सारी घटनाएं सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के बीच पहुंची और मजबूरी में पुलिस विभाग (MP Cop News) के अधिकारियों को अपने महकमे के अधिकारी और कर्मचारियों को सस्पेंड करने जैसे सख्त कदम उठाकर अपने होने का अहसास कराना पड़ा। हकीकत यह है कि शहर के सभी थानों में क्षेत्र के निगरानी गुंडा और बदमाशों को संरक्षित किया जा रहा है। क्योंकि उनके आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए जनता के बीच कारनामे उजागर करने थानों की पुरानी परंपरा को अघोषित रुप से बंद कर दिया गया है।
आम जनता के लिए सूचना पटल पर नहीं है जानकारी
जानकारी के अनुसार कमला नगर (Kamla Nagar) थाना क्षेत्र में रहने वाले राजकुमार पांडे (Rajkumar Pandey) पिता स्वर्गीय रामनरेश पांडे उम्र 55 साल के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी को भी झांसा देकर लाखों रुपए का गबन किया। इसके अलावा कमला नगर में एक महिला के वाहन नहीं उठाने पर पूरे परिवार के साथ जमकर मारपीट की गई थी। यह दोनों मामले ठंडे बस्ते में थे। लेकिन, मुख्यालय स्तर पर हुई शिकायत के बाद राजधानी की पुलिस जागी। इसके बाद कमला नगर थाना पुलिस से अप्रैल, 2026 में उसके खिलाफ प्रतिवेदन बुलाया गया। पूर्व में दर्ज प्रकरणों के आधार पर डीसीपी जोन—1 अखिल पटेल (DCP Akhil Patel) ने उसे आदतन अपराधी मानते हुए गुंडा सूची में शामिल करने के आदेश दिए। लेकिन, उसकी जानकारी सूचना पटल में आज तक उपलब्ध आम जनता के लिए नहीं कराई गई। यानि गोपनीय तरीके से पुलिस महकमा किसी भी व्यक्ति को निगरानी गुंडा, बदमाश बनाकर उनके साथ अपने हिसाब से खेल कर रहा है।
इससे पहले भी कमला नगर थाने ने राजकुमार पांडे के प्रति काफी दरियादिली दिखाई थी। यह पहला मामला नहीं है। इसी तरह पुलिस दल पर हमला करने वाले कमला नगर थाने के निगरानी बदमाश और राजपूत करणी सेना (Rajput Karni Sena) का जिला अध्यक्ष हेमंत ठाकुर (Hemant Thakur) के मामले में भी दरियादिली दिखाई थी। हेमंत ठाकुर सटोरिया है और उसकी पुलिस विभाग में गहरी पैंठ है। यह मामला भी सोशल मीडिया में उजागर हुआ तो उपायुक्त जोन—1 अखिल पटेल ने कदाचरण मानते हुए हवलदार दीपक कटियार (HC Deepak Katiyar) को लाइन हाजिर किया गया था। हवलदार के संदेहास्पद आचरण के चलते टीटी नगर और स्टेशन बजरिया में भी वे लाइन हाजिर हो चुके थे। इसके बावजूद पुलिस उपायुक्त ने कार्रवाई में दो तरह के आचरण पेश किए। एक मामले में तो सीधे निलंबित कर दिया जबकि दूसरे मामले सिर्फ लाइन हाजिर करके अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया।
निजी जानकारी बताकर निगरानी करने वाले अफसरों ने पल्ला झाड़ा
ग्राफिक डिजाइन टीसीआई
इसी तरह गोविंदपुरा (Govindpura) थाने के निगरानी बदमाश गोपाल पाटील उर्फ भाउ (Gopal Patil@Bhau) ने अधिवक्ता बनवारी लाल शर्मा (Advocate Banwari Lal Sharma) को फोन लगाकर धमकाया था। दरअसल, उन्होंने गोविंदपुरा एसीपी अदिति भावसार सक्सेना (ACP Aditi Bhawsar Saxena) के कोर्ट से दिए जा रहे जमानत के मामले में आर्थिक लाभ लेने के आरोपों की शिकायत की थी। इसी शिकायत को वापस लेने के लिए निगरानी बदमाश गोपाल पाटील की तरफ से सहायक पुलिस आयुक्त को बड़ी बहन बताकर धमकाया गया। सिलसिलेवार हो रहे इन खुलासों के बाद पुलिस महकमे से राजधानी के थानों के बदमाशों की चार श्रेणियों में बनने वाली आधिकारिक सूची पहले मौखिक मांगी गई। जिसको अफसर देने से कतराते नजर आए। इस कारण सूचना के अधिकार में आवेदन लगाया गया तो थाने से इस मामले को आदतन और निगरानी बदमाशों की निजता का मामला बताकर जानकारी देने से इंकार कर दिया गया।
शहर में बेहतर पुलिसिंग की आड़ को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय (MP PHQ) की लगभग हर शाखा करोड़ों रुपए का व्यय प्रचार में कर रही है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार (Police Commissioner Sanjay Kumar) सड़कों पर उतरकर जनता से संवाद करके बदमाशों पर नकेल कसने की शपथ दिलाकर कुर्सी में बैठ जाते हैं। लेकिन, मैदानी हकीकत सामने आने पर शहर में हर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से किनारा कर लेता है। एक तरफ प्रशासकीय सुधार की आड़ में पुलिस महानिदेशक से लेकर आरक्षक स्तर की वेतन, संपत्ति और सेवा पुस्तिका सूचना के अधिकार में दी जा रही है और उसका प्रदर्शन करना भी अनिवार्य हैं। लेकिन, दूसरी तरफ शहर के थानों में लगने वाले निगरानी गुंडा, निगरानी बदमाश और आदतन संपत्ति संबंधित अपराधियों के सूचना पटल ही गायब हो गए हैं।
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