Bhopal News: किसान यूनियन के पदाधिकारियों की मांग पर अन्य जिलों से रवाना हो रहे कार्यकर्ता, वीर सावरकर सेतु में रात गुजारी, ड्रोन से चल रही निगरानी, शहर की दो लाख से अधिक वाहनों की यातायात व्यवस्था परिवर्तित मार्ग के भरोसे, मेट्रो निर्माण के चलते ज्यादा दुविधा

भोपाल। राजधानी में किसानों का जत्था 36 घंटे पहले प्रवेश कर गया था। उन्हें रोकने मिसरोद से लेकर बागसेवनिया तक तमाम कवायद की गई थी। अब किसान यूनियन ने वीर सावरकर सेतु में डेरा जमा लिया है। इधर, पुलिस मुख्यालय (Bhopal News) ने सभी रेंज के पुलिस महानिरीक्षकों से सतर्कता बरतने और जिला मुख्यालय में ही किसानों के दलों को रोकने का आदेश दिया है। इधर, किसानों के संगठन ने जितनी देरी उतनी संख्या पहुंचने की चेतावनी दी है। किसान अपने साथ एक सप्ताह का भोजन लेकर आए हुए हैं।
किसान आंदोलन का दिखने लगा असर
जानकारी के अनुसार किसानों की तीन प्रमुख मांगों में मूंग खरीदी और ई—टोकन व्यवस्था को स्थगित कराना है। इधर, किसान आंदोलन के चलते मंडीदीप से लेकर व्यवसायिक क्षेत्र एमपी नगर में इसका प्रभाव दिखने लगा है। दरअसल, वीर सावरकर सेतु जो डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सेतु (V) से जुड़ता है उसका यातायात पूरी तरह से ठप्प हैं। इसलिए यहां से गुजरने वाले वाहनों को हबीबगंज नाका के रास्ते गुजारा जा रहा है। इस कारण यातायात का भारी दबाव क्षेत्र की लगभग पांच लाख आबादी को झेलना पड़ रहा है। भोपाल एम्स (Bhopal AIIMS) आने वाले मरीजों की हालत सर्वाधिक चिंताजनक है। इसके अलावा रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (Rani Kamlapati Railway Station) पहुंचने वाले यात्रियों से आटो और निजी वाहन कंपनी मनमाना किराया वसूल रही है। किसानों का दल अपने साथ एक सप्ताह का राशन लेकर आया है। उसने मंगलवार रात वीर सावरकर सेतु में ही दाल बाटी बनाई है। इधर, पुलिस बल ने बाणगंगा चौराहे से लेकर मुख्यमंत्री निवास (CM House) के चारों तरफ भारी किलाबंदी भी कर दी है। पुलिस की तरफ से सोशल मीडिया के जरिए भी निगरानी रखी जा रही है। जिसमें किसान नेताओं (Farmer Leader) के बयान वायरल हो रहे हैं। किसान संगठनों ने अपनी मांगों के समर्थन में अन्य जिलों से राजधानी पहुंचने की अपील की है। पुलिस सूत्रों की माने तो दतिया चुनाव के चलते सरकार किसी तरह की सख्ती बरतने के मूड में अभी दिखाई नहीं दे रही है। दो दिन बाद किसान आंदोलन की वास्तविकता उजागर होने की आशंका हैं। पुलिस की तरफ से धरने पर बैठे किसानों पर ड्रोन के जरिए विशेष निगाह रखी गई है। वहीं बैरीकेड तोड़ने और वाहनों को नुकसान पहुंचाने का आकलन भी किया गया है। इस संबंध में मिसरोद और बागसेवनिया (Bagsewania) थाने के रोजनामचे में रिपोर्ट भी डाली गई है। पूरी स्थितियों पर निगाह रखते हुए प्रदर्शन में आए सभी किसानों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
किसानों के मार्ग में आम नागरिकों को रोकटोक

इससे पहले भोपाल पुलिस (Bhopal Police) की तरफ से बागसेवनिया थाने के आगे केएन प्रधान तिराहे पर बैरीकेड लगाकर एमपी नगर से नर्मदापुरम की तरफ जाने वाला यातायात 28 जुलाई को जबरिया रोका गया था। जबकि उस वक्त किसान समरधा (Samardha) के पास थे। इसी तरह मिसरोद (Misrod) थाने के सामने नर्मदापुरम की तरफ जाने वाला ट्रेफिक रोक दिया गया। यहां कार एमपी-04-सीव्ही-8029 कार में सवार दंपति पुलिस कर्मियों से गिड़गिड़ाता रहा। उन्हें नोबल अस्पताल जाना था। परिवार ने तमाम मेडिकल रिपोर्ट भी दिखाई। लेकिन, पुलिस का कहना था कि उन्हें रिपोर्ट की बजाय अस्पताल का पर्चा देखना हैं। मिसरोद थाना पुलिस का तर्क था कि इस रोड पर कई अस्पताल हैं। इसलिए कोई भी अस्पताल की रिपोर्ट देखकर वह कार को आगे जाने की अनुमति नहीं देंगें। आईपीएस स्कूल के सामने किसानों को रोकने के लिए ब्रिज के उतरने वाले हिस्से पर दोनों मार्ग पर बैरीकेड लगाकर चार बसें गिरफ्तारी के लिए खड़ी की गई थी। यहां किसानों ने उन्हें उखाड़ने के बाद तोड़कर सड़क के दोनों तरफ फेंक दिया। इसके बाद एक-एक करके किसानों के वाहन और कार्यकर्ता निकलने लगे। उन्हें रोकने के लिए जिस बस (Bus) एमपी-03-ए-8912 से पुलिस कर्मियों को लाया गया था उसे मार्ग में आड़ा करके लगा दिया। बस में किसानों ने हाथ से पीट-पीटकर विरोध जताने के बाद धक्का लगाकर उसे किनारे कर दिया। इसके बाद पुलिस कर्मियों ने किसी तरह का प्रयास किसानों के सामने आने का नहीं किया।
भयावह प्रदूषण और शोर से रहवासी परेशान
मंगलवार को किसानों की रैली के आगे-पीछे भारी पुलिस बल तैनात था। जिन्हें रास्ता देने के लिए एमपी नगर से बरकतउल्ला की तरफ जा रहा यातायात भोपाल एम्स की तरफ परिवर्तित मार्ग से चलाया जाने लगा। जिस कारण साकेत नगर (Saket Nagar) 9-सी के कई कॉलोनियों में वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण वायु और ध्वनि प्रदूषण होता रहा। यह आलम भोपाल एम्स से लेकर कटारा हिल्स, दानिश नगर, रजत नगर तक यातायात अवरुद्ध होने लगा। भोपाल यातायात पुलिस (Bhopal Traffic Police) इस अवस्था के बारे में कल्पना भी नहीं कर सकी। किसानों का नेतृत्व कांग्रेस नेता राजकुमार पटेल (Congress Leader Rajkumar Patel) समेत अन्य कर रहे थे। उन्होंने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में मूंग खरीदी और प्रदेश की ई-टोकन व्यवस्था को स्थगित करने की मांग प्रमुख थी। इस आंदोलन में किसानों की संख्या चार-पांच सौ तक थी। आंदोलन में भोपाल के किसान भी शामिल हुए थे। लेकिन, सिर्फ दो मांगों के कारण शहर की दो लाख से ज्यादा आबादी को किसानों के कारण तीन घंटें अव्यवस्थाओं में झोंक दिया गया। पुलिस मामले की गंभीरता को समझ ही नहीं सकी। जबकि इस संबंध में पुलिस मुख्यालय (PHQ) की तरफ से तीन दिन पूर्व सतर्कता बरतने पुलिस मुख्यालय के गुप्तचर शाखा से निर्देश जारी हुए थे।
खबर के लिए ऐसे जुड़े

हमारी कोशिश है कि शोध परक खबरों की संख्या बढ़ाई जाए। इसके लिए कई विषयों पर कार्य जारी है। हम आपसे अपील करते हैं कि हमारी मुहिम को आवाज देने के लिए आपका साथ जरुरी है। हमारे www.thecrimeinfo.com के फेसबुक पेज और यू ट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें। आप हमारे व्हाट्स एप्प न्यूज सेक्शन से जुड़ना चाहते हैं या फिर कोई घटना या समाचार की जानकारी देना चाहते हैं तो मोबाइल नंबर 7898656291 पर संपर्क कर सकते हैं।