Bhopal Double Murder: कपल डबल मर्डर केस में एक पखवाड़े बाद भी खाली हाथ पुलिस, प्रापर्टी डिस्प्यूट के चलते मर्डर की कहानी बनाना महंगा पड़ा, एसआईटी में अधिकारियों की फौज फिर भी कई संगीन बिंदुओं को किया गया दरकिनार

भोपाल। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कॉलोनी में सत्रह दिन पूर्व हेमंत फिलेमोन और उनकी पत्नी शकुंतला बारीक के मर्डर केस में भोपाल (Bhopal Double Murder) शहर की ऐशबाग थाना पुलिस के पास अभी तक कोई सुराग नहीं मिला हैं। संपत्ति विवाद के पीछे मर्डर को तर्क बनाकर जांच कर रही पुलिस का शक महिला के भाई-भाभी और उनके परिजनों पर संदेह जताते हुए सिमटा रह गया। पुलिस के पास मर्डर को अंजाम देने वाले दो संदेहियों की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज हैं। जिसे सुपारी देकर हत्या कराने का शक पुलिस को हैं।
पुलिस की कहानी में कई शिकायतें लंबित मिली
हत्याकांड से पूर्व शकुंतला बारीक (Shakuntala Barik) का 10 जून को मोबाइल (Mobile) चोरी गया था। यह मोबाइल सुभाष नगर अंडरब्रिज के पास भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम (SBI ATM) के पास से चोरी हुआ था। इसकी रिपोर्ट गोविंदपुरा (Govindpura) थाने में भी दर्ज कराई थी। यह मोबाइल चोरी होने की रिपोर्ट भी पुलिस ने दर्ज नहीं की थी। यह एंड्रायड मोबाइल था जिसका डेटा भी डिलीट हो गया है। इसी तरह हेमंत फिलेमोन (Hemant Philemon) का हत्या के बाद उठाया गया मोबाइल का डेटा पूरी तरह से डिलीट करने के बाद कजलीखेड़ा (Kajlikheda) थाना क्षेत्र में फेंका गया था। इससे साफ है कि पुलिस के पास अब सिवाय सतही जांच बिंदु बनाकर हत्याकांड सुलझाने के अलावा कोई शेष नहीं रहा। हालांकि पुलिस ने शकुंतला से जुड़े पूरे परिवार की इस दौरान खाक छान ली है।
भैया-भाभी भी बोले पुलिस की जांच बिंदु गलत
इस पूरे हत्याकांड (Bhopal Double Murder) को सुलझाने के लिए शकुंतला के छोटे भाई विनोद बारीक (Vinod Barik) और उनकी कस्तूरबा अस्पताल में नौकरी करने वाली पत्नी शिबानी बारीक (Shivani Barik) निशाने पर हैं। दोनों दंपति पिछले पंद्रह दिनों से एक दर्जन से अधिक अधिकारियों के पूछे गए सवाल-जवाब को बताते थक गए हैं। दंपति ने 12 जुलाई को बातचीत करते हुए बताया कि पुलिस के पास कोई सबूत ऐसे नहीं है जिससे वह न्यायालय को बता सके कि इस कारण हत्या की गई है। उन्हें भारी कर्ज में डूबे भाई और भाभी के कर्ज को ही संदेह जताकर पूछताछ की जा रही है। यह कर्ज भी दंपति के बेटे जो चर्चित गायक कलाकार बनाने हुआ था। उसका दिल का दौरा आने के कारण निधन हो गया। जिस कारण पूरा परिवार उसे तैयार करने में लिए गए कर्ज से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है।
दुर्घटना के बाद कार चलाना छोड़ दिया

शिबानी बारीक ने बताया कि शकुंतला उनसे हर महीने मिलने आती थी। उसे कस्तूरबा अस्पताल (Kasturba Hospital) से दवा लेना होती थी। शकुंतला उसी अस्पताल में पहले नर्स थी। अस्पताल के सामने ही शिबानी बारीक का घर हैं। वह अपनी कार से आना-जाना करती थी। कार चलाते वक्त अप्रैल, 2025 में दुर्घटना हुई थी। जिसके बाद कार से चलना भी शकुंतला ने बंद कर दिया था। यह मामला भी थाने पहुंचा था जिसमें पुलिस ने प्रकरण दर्ज ही नहीं किया था। कार दिल्ली के पते पर पंजीकृत थी जिसे राजेंद्र कुमार कुशवाहा (Rajendra Kumar Kushwah) चला रहे थे।
पति के साथ ज्यादा बनती नहीं थी
परिवार से हुई बातचीत में पता चला है कि रेलवे के डाक पार्सल विभाग में काम करने वाले हेमंत फिलेमोन काफी शराब पीते थे। जिस कारण शकुंतला बारीक की बनती नहीं थी। दोनों का मामला 2001 में महिला थाने पहुंचा था। जिसमें पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे थे। हालांकि कुछ साल बाद दोनों में सुलह हो गई और ऐशबाग स्थित मकान को खरीदकर वहां रहने लगे थे।
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