Bhopal Exclusive News: राजधानी का एपस्टीन,बारीकी से होती जांच तो शहर के कई सफेदपोश हो जाते बेनकाब

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी के लिए प्यारे मियां सरकारी साख के लिए कलंक हैं। उसके कारनामे पहले छोटी चोरी से शुरु हुए थे। उसे उन मामलों में संरक्षण मिलता रहा और चार दशक के भीतर में चार सौ रुपए का वेतन पाने वाला दुबई में संपत्ति का मालिक बन गया। यह सारा पैसा (Bhopal Exclusive News) मासूम बच्चियों की ज्यादती कराकर कमाया गया था। वह पिछले छह साल से सलाखों के पीछे तो हैं लेकिन, उसकी कई परतें आज तक निकलकर बाहर ही नहीं आ सकी। वह जिन बच्चियों के साथ ज्यादती करता था वह उसे अब्बू कहकर पुकारती थी। प्यारे मियां को 27 शाम ज्यादती के मामले में दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई है। यदि उसे तीन दशक पहले ही सीखचों के पीछे पहुंचा दिया होता तो वह माफिया नहीं बन सकता था।
कांग्रेस शासन काल में ज्यादा पनपा
प्यारे मियां (Pyare Miya) की संपत्ति भोपाल के अलावा इंदौर (Indore) में भी थी। बुधवारा (Budhwara) में अफकारा मांगालिक भवन अवैध बनाया था। जिसे सरकार ने जमींदोज भी किया था। इसके ही पास शारिक मछली (Shariq Machli) का भी परिवार रहता है। वह भी लव जिहाद (Love Jihad) मामले में दो साल पहले सुर्खियों में आया है। इन्हीं संपत्तियों के बीच विधायक विश्राम गृह के पास पांच हजार स्क्वायर फीट से अधिक की जमीन पर कब्जा कर रखा था। उसने यहां अस्थायी शेड में वर्कशॉप बनाकर अपनी हुकूमत कांग्रेस शासन काल में चलाता आया था। उसके अवैध कब्जे को हटाने कांग्रेस (Congress) सरकार को भी काफी पसीना आया था। सरकार ने 2022 में कब्जा हटाने का फैसला किया। उस जमीन पर उसने 1990 में कब्जा कर लिया था। उसने वर्कशॉप के बाद दैनिक अफकार का बोर्ड लगाकर पत्रकारिता की आड़ में रुतबा दिखाकर कब्जा किया था। उसे दर्जनों नोटिस दिए गए थे। सरकार ने अदालत की फटकार के बाद मजबूरी में उसे खाली कराया था। उस वक्त भी जब कार्रवाई हुई थी तब 40 पेटी अवैध शराब (Illegal Liquor) मिली थी।
कीला ठोंकने का काम उमेश तिवारी को सौंपा
राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी उमेश तिवारी (Umesh Tiwari) मध्यप्रदेश सरकार के लिए हर दुविधा वाली घटनाओं में संकटमोचन बने हैं। पिछले साल जहांगीराबाद (Jahangirabad) पुलिस ने अवैध गोमांस का ट्रक पकड़ा था। उसकी जांच के लिए बने विशेष दल का प्रभारी उमेश तिवारी को ही बनाया गया था। जबकि वे हबीबगंज संभाग में सहायक पुलिस आयुक्त थे। पिछले महीने रातीबड़ (Ratibarh) में स्थित सूरज नगर (Suraj Nagar) में प्रशासनिक सेवा से निवृत्तमान अधिकारी राकेश अग्रवाल (IAS Rakesh Agrawal) हत्याकांड की भी विशेष जांच दल का नेतृत्व भी इनके ही पास है। जबकि वे पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हैं। इससे पहले रातीबड़ में ही प्यारे मियां ज्यादती मामले की विशेष टीम में उन्हें जिम्मेदारी प्रकरण को सुलझाने के लिए दी गई थी। उस वक्त वे टीटी नगर (TT Nagar) संभाग में उप पुलिस अधीक्षक थे।
फोटो-वीडियो के अलावा कॉल डिटेल जांच से गायब

प्यारे मियां कांड की जांच शुरु से ही विवादों में रही। यह मामला 11-12 जुलाई, 2026 की दरमियाीन रात रातीबड़ स्थित सूरज नगर चौकी के समक्ष उजागर हुआ था। दरअसल, मोपेड (Moped) पर सवार नशे में धुत्त हंगामा करते वक्त आधा दर्जन नाबालिगों को पुलिस ने दबोच लिया था। जिन्हें नवासी बताकर उन्हें छुड़ाने कार से प्यारे मियां ही पहुंचा था। उस वक्त थाने के प्रभारी सुधेश तिवारी (Sudhesh Tiwari) थे। मामला एक दिन पूरी तरह से दबाकर रखा गया। लेकिन, जब उसकी मीडिया रिपोर्टिंग हुई तो सरकार जागी थी। जिसमें प्राथमिक जांच में पता चला कि नाबालिगों को शाहपुरा (Shahpura) स्थित विष्णु हाईटेक सिटी (Vishnu Hi-Tech City) में पार्टी के लिए ले जाया गया था। वहां उन्हें नशा कराने के बाद ज्यादती की गई थी। ऐसा पहली बार उनके साथ नहीं हुआ था। यह मामला शुरुआत से ही विवादों में रहा। जिसमें पुलिस ने भी गंभीरता तो दिखाई लेकिन जांच को सिर्फ प्यारे मियां तक ही सिमटा दिया। पुलिस ने अपनी अभियोजन पत्र में प्यारे मियां के साथ थाने पहुंचे रसूखदारों समेत फरारी के दौरान किए गए मोबाइल कॉल डिटेल को जांच में शामिल ही नहीं किया। इसके अलावा मोबाइल के कई वीडियो (Video) भी जांच में शामिल नहीं किए गए।
विशेष तकनीक से खुलता और बंद होता था कमरा
शाहपुरा, रातीबड़ थाना पुलिस के अलावा प्यारे मियां के खिलाफ कोहेफिजा (Kohefiza) थाने में भी प्रकरण दर्ज हुआ था। उसके लिए नाबालिग लड़कियों का इंतजाम करने की जिम्मेदारी स्वीटी विश्वकर्मा उर्फ हंप्टी (Sweety Vishwakarma@Humpty) के पास थी। पूछताछ में एक नाबालिग ने खुलासा किया था कि प्यारे मियां उसे सिंगापुर (Singapore) भी ले जाकर ज्यादती कर चुका है। यह सबकुछ नौकरी दिलाने का झांसा देकर शुरु हुआ था। उसको भोपाल पुलिस ने 15 जुलाई को श्रीनगर में दबोचा था। उस वक्त उसकी उम्र 68 साल थी। आज वह 74 साल का हो चुका है। पत्रकारिता से राजधानी का कारोबारी फिर उत्सव की आड़ में वह सरकार और अफसरशाही गलियारा में पेंठ बना चुका था। उसकी अय्याशी के अड्डों में श्यामला हिल्स (Shyamla Hills) स्थित अंसल इंक्लेव (Ansal Enclave) का फ्लैट पुलिस को हैरानी में डालने वाला था। यहां जब पुलिस ने छापा मारा था तब वन्य जीव की खालें, कई बंदूकें, दर्जनों विदेशी शराब की बोतल के अलावा अवैध बीयर बार भी मिला था। यह विशेष कमरा बहुत तकनीक से खुलता और बंद होता था। प्यारे मियां ने घोषित तौर पर दो शादियां की थी। जिससे तीन बेटे भी उन्हें हुए थे। तीनों बेटों के खिलाफ भी टीटी नगर पुलिस ने कोरोना गाइड लाइन का उल्लंघन करने पर दबोचा था।
अरबों रुपए की संपत्ति का मालिक
प्यारे मियां ने 1980 में एक समाचार पत्र में कम्पोजिटर से काम शुरु किया था। वहां से उसे सिर्फ चार सौ रुपए वेतन मिलता था। जिसके बाद वह चार दशक में देखते ही देखते करोड़पति हो गया। उसके खिलाफ जांय की गई तो उसकी संपत्ति भोपाल के अलावा विदेश में भी मिली। उसकी इंदौर और सीहोर जिले में जमीन और दुबई की संपत्ति मिलाकर 46 संपत्ति के दस्तावेज मिले थे। जांच में पता चला कि उसके परिवार ने करोड़ों रुपए का आयकर भी अपने रसूख के दम पर नहीं भरा। हालांकि परिवार को नोटिस भी जारी हुए थे। प्यारे मियां ने 1990 में लॉटरी भी चलाई थी। उस वक्त नकली टिकट बेचने का चलन भी था। लेकिन, सरकार राजस्व हानि को भूलते हुए उसे ही आगे बढ़ाती रही। उसका रसूख गिरफ्तारी के बाद भी था। उसने अदालत में हाजिर होते वक्त पुलिस की ही टोपी पहन रखी थी। यह तस्वीरें भी वायरल हुई थी।
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