Bhopal Cop News: शहर के उपायुक्त जोन-3 कार्यालय को भी मिला प्रमाण पत्र, जर्जर भवनों को नया कलेवर में किया गया

भोपाल। राजधानी के चार जर्जर भवनों को नया कलेवर में करने के बाद उसे आईएसओ प्रमाण पत्र मिला। इसमें चार थानों (Bhopal Cop News) का चयन किया गया। इसके अलावा एक पुलिस उपायुक्त कार्यालय भी चुना गया। यह प्रमाण पत्र वितरित करने से संबंधित आयोजन बागसेवनिया थाने में 05 अक्टूबर की शाम आयोजित किया गया।
गुणवत्ता और मानकों के आधार पर हुआ चयन
जानकारी के अनुसार बागसेवनिया (Bagsewania), अशोका गार्डन (Ashoka Garden), कोलार रोड (Kolar Road) और खजूरी सड़क (Khajuri Sadak) थाने को आईएसओ (ISO) की तरफ से यह 9001:2015 का प्रमाण पत्र दिया गया। इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर संजय कुमार (Police Commissioner Sanjay Kumar), डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान (DCP Shailendra Singh Chauhan) समेत सभी जोन के डीसीपी मौजूद थे। सभी थानों को प्रमाण पत्र मिलने से पूर्व उनका जीर्णोद्धार किया गया। पुराने रिकार्ड को नष्ट तथा संधारित किया गया, आमजनों के बैठने की व्यवस्था की गई तथा थाने के सौंदर्यीकरण तथा जनोन्मुखी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किया गया। आईएसओ की टीम ने मूल्यांकन, गुणवत्ता और मानकों के आधार पर चारों थानों को चयनित किया गया। इससे पहले मिसरोद(Misrod), रातीबड़ (Ratibarh), और महिला थाना (Mahila Thana) को यह प्रमाण पत्र मिल चुका है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जनोन्मुखी सेवाओं के लिए होने वाले नवाचार का लाभ जनता को मिलना चाहिए। उन्होंनें अन्य थाना प्रभारियों को भी इस तरह के नवाचार की सलाह दी।
तीन थानों को अपनी जमीन बचाने करना पड़ रहा संघर्ष
राजधानी के जिन चार थानों को आईएसओ प्रमाण पत्र मिला है उसमें से तीन मुख्य मार्ग पर हैं। एमपी नगर (MP Nagar) थाने की सीमा तो डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सेतु निर्माण के चलते विवादों में आ गई थी। इसलिए पुलिस महकमे ने थाना बचाने मंदिर निर्माण करके जमीन बचाई। इसी तरह कोलार रोड थाना छह लेन मार्ग के चलते बीच रोड पर आ चुका है। मुख्य मार्ग से सिर्फ चार किलोमीटर के फासले पर अब मुंशी कक्ष पहुंच गया है। एमपी नगर थाने को तो प्रवेश मार्ग बदलना पड़ा है। वहीं कोलार रोड थाने के जब्ती वाहनों को पिछले हिस्से में रखा गया है। इसी तरह बागसेवनिया थाने में भी आगंतुक वाहनों की पार्किग की विकराल समस्या हैं। यह थाना भी बीआरटीएस कॉरिडोर के चलते पिछले डेढ़ दशक में सिकुड़ता चला गया। आलम यह है कि यहां भी मंदिर निर्माण करके थाने की सीमा तय की गई है।
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