MP Youth Congress Election 2020 : कौन जीतेगा ‘अपनों’ के बीच छिड़ी जंग

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दो विधायक भी युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के उम्मीदवार

अध्यक्ष पद के उम्मीदवार

भोपाल। MP Youth Congress Election 2020 मध्यप्रदेश में युवा कांग्रेस चुनाव ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। 15 साल बाद सरकार बनी है, लिहाजा संगठन के इस चुनाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि दो विधायक भी इस बार चुनावी मैदान में उतर आए है। अब तक युवा नेता, प्रदेश अध्यक्ष बनकर विधायक बनते थे। लेकिन प्रदेश में पार्टी पॉवर में है लिहाजा उल्टी गंगा बहने लगी है, विधायक भी प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते है। इसी बीच चुनाव के ऐनवक्त पर प्रक्रिया में किए गए बदलाव की वजह से कई युवा नेताओं के सपनों पर पानी फिर गया है। नामांकन से पहले साक्षात्कार की प्रक्रिया अपनाकर संगठन ने कई नेताओं को अध्यक्ष पद के लिए अपात्र घोषित कर दिया है।

शनिवार को इंडियन यूथ कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के अध्यक्ष और महासचिवों की परफॉर्मर लिस्ट जारी कर दी। आईवायसी ने 16 नेताओं को अध्यक्ष पद के लिए पात्र माना है। वहीं प्रदेश महासचिव के लिए 193 युवा नेताओं की लिस्ट जारी की गई है। इस लिस्ट में विधायक सिद्धार्थ सिंह कुशवाह और भूपेंद्र मरावी का भी नाम है। वहीं एनएसयूआई के अध्यक्ष विपिन वानखेड़े, पूर्व केंद्रीय मंत्री और विधायक कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक दोनों ही विधायकों समेत कुछ लोगों ने परफॉर्मर लिस्ट में शामिल होने के लिए इंटरव्यू नहीं दिए थे। सूत्रों का कहना है कि इंडियन यूथ कांग्रेस की तरफ से ये नाम जोड़े गए है। वहीं सूत्रों के मुताबिक अभी कुछ नाम ओर भी जोड़े जा सकते है। शनिवार को नॉमिनेशन का आखिरी दिन था। जानकारी के मुताबिक 16 में से 6 लोगों ने नॉमिनेशन ही नहीं किया है। लिहाजा अध्यक्ष पद के लिए फिलहाल 10 उम्मीदवार है।

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कौन बनेगा अध्यक्ष

संजय सिंह यादव – युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव संजय सिंह यादव मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार है। संजय सिंह को बेहद ही मजबूत उम्मीदवार बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक संजय सिंह, मंत्री लाखन सिंह यादव के भतीजे है। वहीं सूत्रों का कहना है कि मंत्री जीतू पटवारी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, विधायक कुणाल चौधरी का भी समर्थन संजय सिंह को मिल रहा है।

विपिन वानखेड़े– मध्यप्रदेश एनएसयूआई के अध्यक्ष विपिन वानखेड़े को जीतने वाला उम्मीदवार बताया जा रहा है। एनएसयूआई अध्यक्ष होने के नाते प्रदेशभर में वानखेड़े से जुड़े कार्यकर्ता है।  आगर-मालवा सीट से विधायक का चुनाव लड़ चुके विपिन वानखेड़े के पास सबसे ज्यादा एक्टिव मेंमब की खबर है। सूत्रों का कहना है कि वानखेड़े के पास 60 हजार एक्टिव मेंबर है। वहीं खबर ये भी है आगर-मालवा से उपचुनाव की तैयारी में जुटे वानखेड़े अपनी जगह प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी का नाम भी आगे बढ़ा सकते है।

सिद्धार्थ कुशवाह– त्रिकोणीय मुकाबले में सतना से विधायक का चुनाव जीतने वाले सिद्धार्थ कुशवाह भी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार है। सूत्रों का कहना है कि सिद्धार्थ को मध्यप्रदेश के मुखिया का साथ मिल सकता है। हालांकि कुशवाह की तरफ से कम मेंबरशिप होने की भी सूचना है। दूसरी तरफ कुशवाह विंध्य के बड़े नेता के धुर विरोधी है, लिहाजा उन्हें क्षेत्र से समर्थन प्राप्त करने में मुश्किल हो सकती है।

विक्रांत भूरिया– पूर्व केंद्रीय मंत्री और विधायक कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया भी अध्यक्ष पद पर उम्मीदवारी कर रहे है। भूरिया राजनीतिक समीकरण बैठाने में कामयाब रहे तो सफलता मिल सकती है। सूत्रों का कहना है कि तकनीकि वजह से विक्रांत का नामांकन नहीं हो सका है, हालांकि परफार्मर लिस्ट में उनका नाम है।

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भूपेंद्र मरावी– बीजेपी के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे को हराकर विधायक बने भूपेंद्र मरावी का नाम भी अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी में सामने आया है। डिंडौरी की शहपुरा सीट से विधायक भूपेंद्र मरावी आदिवासी चेहरा है।

वहीं प्रदेश अध्यक्ष पद के उम्मीदवार ग्वालियर के पुनीत शर्मा  और इंदौर के पवन जायसवाल को सिंधिया गुट का उम्मीदवार बताया जा रहा है। भोपाल के कृष्णा घाडगे की अध्यक्ष पद पर उम्मीदवारी परफार्मर लिस्ट सामने आने के बाद खत्म हो गई है। उनका नाम प्रदेश महासचिव की लिस्ट में है। बता दें कि घाडगे ने साक्षात्कार की प्रक्रिया का विरोध किया था।

वोटिंग की तारीखों में होगा बदलाव

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प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों का चुनाव होना है। लिहाजा युवा कांग्रेस चुनाव में वोटिंग की तारीखों में परिवर्तन हो सकता है। 16-17 मार्च को होने वाली वोटिंग 29-30 मार्च को हो सकती है। चुनाव निरस्त होने की खबर फैलाई रही है, हालांकि नेताओं ने इसे अफवाह बताया है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में आए राजनीतिक भूचाल के चलते बड़े नेता, युवा कांग्रेस के चुनाव की तरफ ध्यान ही नहीं दे पा रहे है।

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