कोरोना वायरस से संक्रमित एक सिपाही की जानकारी सार्वजनिक न होने पर मचा हुआ है घमासान

भोपाल। (Madhya Pradesh Police Gossip) मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल कोरोनावायरस के संक्रमण में ज्यादा है। इस बीमारी की चपेट में आम नागरिकों के अलावा स्वास्थ्य और पुलिस महकमे के कई कर्मचारी आए हैं। पुलिस मुख्यालय, ईओडब्ल्यू मुख्यालय से लेकर तमाम कई थाने इस बीमारी की जद में आए थे। इसके बाद अफसरों ने सिस्टम में बदलाव भी किया। कई थानों के कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए बोला गया। लेकिन, पुलिस महकमे के एक यूनिट में इस बीमारी को लेकर स्पेशल ट्रीटमेंट चल रहा है। यह ट्रीटमेंट अफसरों की नजर में कारगर है लेकिन खौफ में कई कर्मचारी है।
खबर है कि यहां के एक कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव आया था। इस बात को सार्वजनिक नहीं किया गया। दरअसल, यह स्पेशल यूनिट है और अफसरों को लगता है कि नाम और चेहरा उजागर कर दिया तो कई दूसरी समस्या आ सकती है। लेकिन, भीतर ही भीतर इस फैसले के खिलाफ चिंगारी सुलग रही है। कर्मचारी ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त, भोपाल पुलिस के थानों समेत कई अन्य अफसरों के उदाहरण देकर हालातों की गंभीरता को बता रहे है। अब देखना यह है कि जिस पुलिसकर्मी को कोरोना पॉजिटिव निकला है उसकी कांटेक्ट हिस्ट्री किसको प्रभावित करती है। अब दहशत में बैठे कर्मचारी उस हिस्ट्री रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
बिना खबर के कार्रवाई
लॉक डाउन में जेल विभाग जमकर सुर्खियों में रहा। इंदौर टाटपट्टी बाखल के बाद से लेकर अब तक। इस दौरान जेल से जुड़े दो समाचार सोशल मीडिया में वायरल हुए। एक समाचार था सीहोर जेल का तो दूसरा समाचार ग्वालियर जेल के भीतर का था। सीहोर जेल का समाचार लोगों के सामने आया। लेकिन, ग्वालियर जेल का समाचार सार्वजनिक ही नहीं हो सका। इसके बावजूद अफसरों ने वहां के जेल अधिकारी को सजा दे दी। हालांकि यह सजा भी रोचक है। उन्हें हटाने की बजाय कुछ समय के लिए अटैच किया गया है।
अपील
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