MP Tender Scam: दो करोड़ रुपए के टेंडर घोटाले में 10 साल बाद एफआईआर
भोपाल। सरकार से एग्रीमेंट के बावजूद काम न करने पर ब्लैक लिस्टेड हुई फर्म को ठेका फर्जी तरीके (Agriculture Marketing Tender Scam) से दे दिया गया। इस घोटाले में मंडी बोर्ड के सीईओ समेत कई अन्य अफसर शामिल थे। यह घोटाला मध्य प्रदेश (MP Tender Scam) के श्योपुर जिले का है। इस बंदरबांट की शिकायत हुई थी। जिसकी जांच ग्वालियर स्थित ईओडब्ल्यू की इकाई कर रही थी। जांच के बाद सरकार ने मामले को भ्रष्टाचार (MP Corrupt Officer News) का मानते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस मामले में ठेकेदार समेत पांच व्यक्तियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज हुई है।
राजधानी में अफसरों ने था फटकारा
यह घोटाला (MP Tender Ghotala) श्योपुर जिले की कृषि उपज मंडी का है। यहां केंद्र सरकार ने कृषि विपणन के लिए सात योजनाएं लांच की थी। इन योजनाओं के लिए निर्माण कार्य होने थे। इसी निर्माण कार्य में धांधली की गई। जिससे सरकार को करीब दो करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। शिकायत शिवराम शर्मा (Shivram Sharma) ने 2010 में की थी। जिसकी बकायदा जांच की गई। जांच में पता चला कि भोपाल मुख्यालय ने काम न करने पर फर्म को काली सूची में डालकर दूसरी बार टेंडर जारी करने के आदेश दिए थे। ऐसा जब किया गया तो फर्जीवाड़ा निकलकर सामने आया। जांच के बाद ईओडब्ल्यू (Gwalior EOW Hindi News) ने पाया कि मध्य प्रदेश राज्य कृषि बोर्ड के सीईओ अशोक कुमार शर्मा (Ashok Kumar Sharma) का इस धांधली में अहम किरदार था।
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एक ठेकेदार ने किया काम
जांच में पता चला कि जो सात ठेके हुए थे। उनमें से मनवीर सिंह चौहान (Manveer Singh Chouhan) को पांच काम के ठेके मिले थे। जबकि एक—एक काम का ठेका एससी त्यागी (SC Tyagi) और बाबूलाल गोयल (Babulal Goyal) को मिला था। पहली निविदा में एससी त्यागी ने अपना काम पूरा किया। बाकी ठेकेदारों ने अपना काम पूरा नहीं किया। इसलिए भोपाल मुख्यालय ने सारे टेंडर निरस्त करके कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड करने और अमानत राशि राजसात करने के आदेश दिए थे। दूसरी बार जब टेंडर हुआ तो उसमें नारायण सिंह चौहान, सुरेन्द्र सिंह तोमर (Surendra Singh Tomar), कामता प्रसाद (Kamta Prasad) और मैसर्स रामनरेश की कंपनी ने बोली लगाई। तत्कालीन सीईओ अशोक कुमार शर्मा ने ठेके नारायण सिंह चौहान (Narayan Singh Chouhan) को दे दिए। जिसके बाद भारी विरोध होने लगा।
यह था विरोध का कारण
ईओडब्ल्यू ने इस मामले में आरोपी अशोक कुमार शर्मा, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री दिनेश गौड (Dinesh Goud), तत्कालीन सचिव अनिरुद्ध सिंह तोमर (Anirudh Singh Tomar), ठेकेदार मनवीर सिंह चौहान (Manveer Singh Chouhan) और नारायण सिंह चौहान को बनाया है। जांच में पता चला कि सीईओ कमेटी में थे जिन्हें ठेकेदारों का चयन करना था। उन्होंने यह जानते हुए कि मनवीर सिंह चौहान और नारायण सिंह चौहान (Narayan Singh Chouhan) भाई है उसके बावजूद ठेका दूसरी बार दे दिया। दोनों आरोपी भाईयों ने ठेका लेने के लिए अपनी पुरानी फर्म के दस्तावेज जैसे आयकर रिटर्न और पैन कार्ड लगाए थे। उनसे यह धांधली आसानी से उजागर भी हो रही थी। ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के खिलाफ धारा 420/467/468/120बी/13 (1) (2) 7 सी (जालसाजी, दस्तावेजों की कूटरचना, साजिश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सरकारी सेवा में भ्रष्टाचार) का मुकदमा दर्ज किया गया।
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