Bhopal Organised Crime: आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने में हो रहा इस्तेमाल, शिक्षा के क्षेत्र से हो रहे दूर

भोपाल। मध्यप्रदेश में नौनिहालों का जीवन संकट पर है। नीतियां बनाने वाले पेशेवर विशेषज्ञों की भारी कमी इसकी वजह बताई जा रही है। जिस कारण सरकार उचित नीतियों को जमीन पर उतारने में नाकाम है। इस अव्यवस्था के चलते किशोर बालक—बालिकाओं (Bhopal Organised Crime) की शिक्षा से लेकर उनके मौलिक अधिकारों की बात नहीं हो रही। बच्चों की नीतियों को लेकर स्वास्थ्य, पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग समेत कई अन्य विभागों के पास जिम्मा हैं। हर विभाग का अलग—अलग दायरा है और क्षेत्राधिकार है। जिस कारण नौनिहाल टुकड़ों में अपने जीवन को लेकर उचित मार्गदर्शक और लक्ष्य तय कर पाने में पिछड़ रहे हैं।
यह है वह घटनाएं जो सिस्टम को आईना दिखाने पर्याप्त हैं
गरीब बस्तियां होती है निशाने पर

पिछले दिनों बागसेवनिया (Bagsevania) थाना पुलिस ने शातिर बदमाश दिलीप भूरिया (Dilip Bhuria) को दबोचा। उसे आठ लाख रुपए हीरा चोरी करने के मामले में गिरफ्तार किया था। वह मूलत: बालाघाट (Balaghat) जिले का रहने वाला था। यहां शबरी नगर (Shabri Nagar) बस्ती में रहते हुए उसने एक नाबालिग को चिन्हित किया। उसकी मदद से आठ महीने में दो घरों में चोरी कराई। उसे सबसे पहले हबीबगंज थाना पुलिस ने पकड़ा था। दिलीप भूरिया के साथ उसका साथी रवि मावी (Ravi Mavi) भी शामिल था। पुलिस ने पहले ही प्रकरण में नाबालिग के कैरियर को लेकर सिस्टम को याद दिलाई होती तोवह दूसरे प्रकरण में नहीं फंसता।
हथियार और ड्रग का सामान मिल रहा
पॉक्सो एक्ट में फंसाने का हो रहा काम
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